रॉबिन विलियम्स के बच्चों ने इस हफ्ते उनके सालों से बंद पड़े इंस्टाग्राम अकाउंट को फिर से चालू कर दिया है, और इसे दिवंगत अभिनेता से जुड़ी AI-जनित डीपफेक्स के खिलाफ एक भरोसेमंद, असली आर्काइव में बदल दिया है। यह घटना इसलिए अहम है क्योंकि यह दिखाती है कि AI के जरिए किसी की छवि के दुरुपयोग को रोकने की लड़ाई अब प्लेटफॉर्म या कानून बनाने वालों से पहले खुद परिवार लड़ रहे हैं।
दरअसल हुआ क्या
ज़ैक, ज़ेल्डा और कोडी विलियम्स ने मंगलवार को एक पोस्ट में इस बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि वे चाहते हैं कि उनके पिता का इंस्टाग्राम प्रोफाइल एक 'सुरक्षित, भरोसेमंद जगह' बने, जहां साझा की गई कहानियां, तस्वीरें, वीडियो और यादें उनकी विरासत को ईमानदारी, गर्मजोशी और सावधानी के साथ दर्शाएं। द वर्ज की रिपोर्ट के अनुसार, ज़ेल्डा विलियम्स ने अपने खुद के अकाउंट पर बताया कि यह कदम उनके पिता की आवाज और छवि के 'बेतहाशा AI दुरुपयोग' से लड़ने के लिए उठाया गया है। उन्होंने लिखा कि असली क्लिप्स के लिए यह पेज बनाना अभी इस दुरुपयोग से लड़ने के सबसे कारगर तरीकों में से एक है। रॉबिन विलियम्स के 2014 में निधन के बाद से यह अकाउंट निष्क्रिय ही पड़ा था। पिछले साल ज़ेल्डा विलियम्स ने सार्वजनिक रूप से फैंस से अपील की थी कि वे उन्हें उनके पिता के AI-जनित वीडियो न भेजें।
यह स्थिति यहां तक कैसे पहुंची
2014 में रॉबिन विलियम्स के निधन के बाद उनका इंस्टाग्राम अकाउंट एक दशक से ज्यादा समय तक अछूता पड़ा रहा। द वर्ज के मुताबिक, पिछले साल ज़ेल्डा विलियम्स ने फैंस से अपने पिता के AI-जनित वीडियो भेजने से मना करते हुए इस ट्रेंड को 'दिमाग खराब कर देने वाला' बताया था। उनकी यह नाराज़गी एक बड़े पैटर्न को दर्शाती है। OpenAI का अब बंद हो चुका Sora ऐप सेलेब्रिटी डीपफेक्स का गढ़ बन गया था, और Wired के अनुसार Grok अब भी मशहूर महिलाओं की सेक्सुअलाइज्ड फेक तस्वीरें बना रहा है। ByteDance के Seedance मॉडल ने Motion Picture Association के साथ एक समझौता किया, क्योंकि कमजोर सुरक्षा उपायों की वजह से यूज़र्स हॉलीवुड सितारों की शक्ल जैसे सीन बना पा रहे थे। स्कैमर्स ने TikTok पर टेलर स्विफ्ट और रिहाना की तस्वीरों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी को भी बढ़ावा दिया है।
आपके लिए इसका मतलब क्या है
सामान्य यूज़र्स के लिए, यह इशारा करता है कि प्लेटफॉर्म नकल रोकने के लिए सिर्फ ब्लैंकेट AI टेकडाउन टूल्स पर निर्भर रहने के बजाय परिवार-संचालित लीगेसी अकाउंट्स का सहारा ले सकते हैं। डेवलपर्स के लिए, किसी तस्वीर या क्लिप की प्रामाणिकता साबित करना अब बाद में सोचने वाली बात नहीं, बल्कि एक प्रोडक्ट फीचर बन रहा है। वेब3 आइडेंटिटी और वेरिफिकेशन टूल्स के लिए, जिनमें वॉलेट-लिंक्ड या ऑन-चेन प्रूफ-ऑफ-ऑथेंटिसिटी सिस्टम शामिल हैं, यह एक जीवंत और परीक्षण योग्य केस बन गया है। जिस किसी की भी छवि क्लोन की जा सकती है, चाहे वह जीवित हो या दिवंगत, उसे भविष्य में एक वेरिफाइड डिजिटल एस्टेट की जरूरत पड़ सकती है।
बड़ा सवाल यह है
किसी दिवंगत व्यक्ति की डिजिटल छवि पर नियंत्रण किसका होना चाहिए: उनके परिवार का, प्लेटफॉर्म का, या AI युग के लिए बनाए जाने वाले किसी भविष्य के कानूनी ढांचे का? रॉबिन विलियम्स का यह मामला दिखाता है कि परिवार अभी कदम उठा सकते हैं, लेकिन इन अधिकारों को परिभाषित करने वाला कोई स्पष्ट कानून मौजूद नहीं है। आने वाले समय में और भी परिवारों को यही चुनौती झेलनी पड़ सकती है।
आगे क्या देखना है
मृत्यु के बाद AI छवि अधिकारों को लेकर किसी नए कानून की कोई तारीख अभी तय नहीं है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य प्लेटफॉर्म भी दिवंगत सार्वजनिक हस्तियों के लिए इस तरह के प्रामाणिक आर्काइव अकाउंट्स अपनाते हैं, और क्या Motion Picture Association और ByteDance के Seedance के बीच हुआ समझौता अन्य AI मॉडल बनाने वाली कंपनियों के लिए एक मॉडल बनता है।



