Amazon, Tesla और SpaceX ने OKX और ICE के बीच हो रहे एक टोकनाइज्ड स्टॉक प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताई है, और अब इस सूची में एतराज़ जताने वाली कुल कंपनियों की संख्या 56 तक पहुंच गई है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट के लिए चुने गए स्टॉक्स में से करीब 80% अब इससे बाहर निकल चुके हैं। यह विरोध एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि बिना संबंधित कंपनी की सहमति के टोकनाइज्ड इक्विटी आखिर काम कैसे कर सकती है।
क्या हुआ है
CoinDesk की रिपोर्ट के मुताबिक, OKX-ICE टोकनाइज्ड स्टॉक प्रोजेक्ट पर आपत्ति जताने वाली कंपनियों की संख्या अब 56 हो चुकी है, जिनमें Amazon, Tesla और SpaceX सबसे ताज़ा नाम हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट के लिए शुरू में चुने गए स्टॉक्स में से करीब 80% अब बाहर निकल चुके हैं, और इसकी आपत्ति दर्ज कराने की डेडलाइन करीब आ रही है। CoinDesk ने न तो डेडलाइन की सटीक तारीख बताई है, और न ही यह बताया है कि शुरुआत में कुल कितने स्टॉक्स चुने गए थे। आउटलेट ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि कंपनियों ने आपत्ति जताने के पीछे क्या कारण दिए, या ऑप्ट-आउट प्रक्रिया वास्तव में कैसे काम करती है। लगभग पांच में से चार कंपनियों का बाहर निकलना यह संकेत देता है कि चुनी गई कंपनियों में बिना औपचारिक सहमति के अपने शेयर टोकनाइज़ किए जाने को लेकर व्यापक नाराज़गी है।
मामला यहां तक कैसे पहुंचा
टोकनाइज्ड स्टॉक्स का मकसद क्रिप्टो एक्सचेंज यूज़र्स को ब्लॉकचेन के ज़रिए असली कंपनियों के शेयरों में एक्सपोज़र हासिल करने का मौका देना है। रिपोर्ट के मुताबिक, OKX और ICE ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनियों का एक बैच चुना था, हालांकि इस चयन के पीछे की शर्तें सार्वजनिक नहीं की गईं। CoinDesk बताता है कि डेडलाइन नज़दीक आने के साथ आपत्ति जताने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर 56 हो गई, जिसमें Amazon, Tesla और SpaceX सबसे नए नाम हैं। उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि कंपनियों को शुरू में कैसे चुना गया, क्या उनसे पहले सलाह ली गई थी, या इस प्रोजेक्ट का कानूनी आधार क्या है। यह जानकारी न होना मायने रखता है, क्योंकि इससे यह सवाल खुला रह जाता है कि किसी कंपनी के शेयर टोकनाइज़ करने के लिए उसकी अनुमति ज़रूरी है या नहीं।
आपके लिए इसके मायने
क्रिप्टो यूज़र्स के लिए, इन ऑप्ट-आउट्स से फिलहाल OKX पर ट्रेड किए जा सकने वाले टोकनाइज्ड स्टॉक्स की संख्या घट सकती है। कहीं और टोकनाइज्ड इक्विटी पर काम कर रहे बिल्डर्स के लिए, यह विवाद संकेत देता है कि इश्यूअर की सहमति अब एक कानूनी मुद्दा बन सकती है, न कि महज़ एक औपचारिकता। किसी भी टोकनाइज्ड स्टॉक प्रोडक्ट के होल्डर्स के लिए यह सवाल उठता है कि अगर संबंधित कंपनी लॉन्च के बाद औपचारिक रूप से आपत्ति जताए, तो क्या होगा। पारंपरिक बाज़ारों से गहरे जुड़ाव रखने वाले पार्टनर ICE के लिए, यह विरोध क्रिप्टो-लिंक्ड प्रोडक्ट्स में उसकी एंट्री को जटिल बना सकता है। उपलब्ध जानकारी में मौजूदा टोकन होल्डर्स पर इसके असर के बारे में कोई विवरण नहीं दिया गया है।
बड़ा सवाल
इस टोकनाइज्ड स्टॉक प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई करीब 80% कंपनियों ने इससे बाहर निकलने का फैसला किया है। इससे एक बड़ा सवाल खड़ा होता है: किसी कंपनी के शेयर टोकनाइज़ करने का अधिकार असल में किसके पास है? क्या यह एक्सचेंज का है, इश्यू करने वाली कंपनी का है, या किसी ऐसे रेगुलेटर का जिसका अभी तक कोई स्पष्ट नियम ही नहीं है? इसका जवाब OKX और ICE से कहीं आगे, आने वाले हर टोकनाइज्ड इक्विटी प्रोडक्ट की दिशा तय कर सकता है।
आगे क्या देखना है
उपलब्ध रिपोर्टिंग में OKX-ICE टोकनाइज्ड स्टॉक प्रोजेक्ट के लिए आपत्ति जताने की सटीक डेडलाइन नहीं बताई गई है। बाज़ार की नज़र इस पर रहेगी कि क्या पहले से आपत्ति जता चुकी 56 कंपनियों में और नाम जुड़ते हैं, या OKX और ICE इसके जवाब में प्रोजेक्ट का दायरा बदलते हैं। डेडलाइन और अगले कदमों से जुड़ी और जानकारी लिखे जाने तक उपलब्ध नहीं थी। Bonuz टोकनाइज्ड इक्विटी प्रोडक्ट्स के व्यापक क्रिप्टो ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचने से जुड़े अपडेट्स पर नज़र बनाए रखेगा।



