ब्रॉडकॉम और वेरिज़ॉन समेत आठ कंपनियों ने OKX और ICE के प्रस्तावित टोकनाइज्ड स्टॉक वेन्यू पर अपने शेयरों के ट्रेडिंग को लेकर आपत्ति जताई है। Nasdaq ने अलग से कहा है कि वह SEC के फ्रेमवर्क से बाहर ही रहेगा। यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि इससे पता चलता है कि पारंपरिक इश्यूअर अपने शेयरों के आसपास बन रही टोकनाइजेशन योजनाओं का खुलकर विरोध कर रहे हैं।
क्या हुआ
CoinDesk की रिपोर्ट के मुताबिक, आठ कंपनियों ने प्रस्तावित OKX-ICE वेन्यू पर ट्रेडिंग का विरोध किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस विरोध में ब्रॉडकॉम और वेरिज़ॉन शामिल हैं। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, Nasdaq ने अलग से कहा है कि वह टोकनाइज्ड स्टॉक ट्रेडिंग के लिए SEC के फ्रेमवर्क से अलग रहेगा। यह आपत्तियां अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) से जुड़े उस फ्रेमवर्क को लेकर हैं, जो कंपनियों के शेयरों के टोकनाइज्ड वर्ज़न को डिजिटल असेट वेन्यू पर ट्रेड करने की अनुमति देगा। इस विवादित वेन्यू की योजना क्रिप्टो एक्सचेंज OKX और ICE ने मिलकर बनाई थी। 18 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में बाकी छह आपत्ति जताने वाली कंपनियों के नाम नहीं बताए गए हैं, और न ही इसमें इन कंपनियों या Nasdaq का कोई सीधा बयान शामिल है।
पृष्ठभूमि
टोकनाइज्ड स्टॉक निवेशकों को ऐसे ब्लॉकचेन-आधारित टोकन ट्रेड करने देता है जो असली कंपनी शेयरों की कीमत को ट्रैक करने के लिए बनाए जाते हैं। क्रिप्टो एक्सचेंज और पारंपरिक मार्केट ऑपरेटर दोनों ही इस तरह की ट्रेडिंग के लिए वेन्यू बनाने की कोशिश करते रहे हैं। क्रिप्टो एक्सचेंज OKX और ICE ने मिलकर एक ऐसा वेन्यू बनाने की योजना बनाई थी, जिसमें ब्रॉडकॉम और वेरिज़ॉन जैसी कंपनियों के शेयर शामिल थे। SEC लंबे समय से एक ऐसा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर रहा है जो तय करे कि इस तरह के टोकनाइज्ड शेयर डिजिटल असेट वेन्यू पर कैसे ट्रेड हो सकते हैं। यह रिपोर्ट इस बात का एक स्पष्ट संकेत है कि जिन कंपनियों के शेयर टोकनाइज़ किए जा रहे हैं, वे भी—सिर्फ रेगुलेटर नहीं—तय कर सकती हैं कि ये प्रोडक्ट्स बाज़ार तक पहुंचें या नहीं।
आपके लिए क्यों मायने रखता है
टोकनाइज्ड इक्विटी प्रोडक्ट बना रहे एक्सचेंजों के लिए यह संकेत है कि रास्ता उम्मीद से कहीं मुश्किल है। इश्यूअर चाहते हैं कि उनके शेयर टोकनाइज़ किए जाएं या नहीं, इस पर उनकी भी राय सुनी जाए—सिर्फ वेन्यू ऑपरेटर की मंजूरी काफी नहीं। टोकनाइज्ड स्टॉक में दिलचस्पी रखने वाले निवेशकों के लिए उपलब्ध टिकर्स की संख्या घट सकती है अगर और कंपनियां भी विरोध करती हैं। इस टेस्ट केस को देख रहे बाकी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स के लिए यह साफ संकेत है कि सिर्फ रेगुलेटरी फ्रेमवर्क होने से इश्यूअर का सहयोग गारंटीड नहीं होता। अन्य तरह के असेट्स को टोकनाइज़ करने की कोशिश कर रहे बिल्डरों को भी उन स्टेकहोल्डर्स से इसी तरह के विरोध की उम्मीद रखनी चाहिए, जिनसे सीधे सलाह नहीं ली गई।
बड़ा सवाल
अगर टोकनाइज्ड स्टॉक ट्रेडिंग के लिए इश्यूअर की सहमति ज़रूरी है, तो आखिर यह तय कौन करेगा कि किसी कंपनी के शेयर ब्लॉकचेन पर मौजूद रह सकते हैं या नहीं—इश्यूअर, वेन्यू बनाने वाला एक्सचेंज, या फ्रेमवर्क तैयार करने वाला रेगुलेटर? ब्रॉडकॉम, वेरिज़ॉन और Nasdaq ने इस सवाल का अलग-अलग जवाब दिया है। इनके फैसलों से यही संकेत मिलता है कि फिलहाल यह अधिकार किसी एक पक्ष के पास नहीं है, जिससे निवेशकों के लिए यह अनिश्चित बना हुआ है कि भविष्य में किन कंपनियों के शेयर टोकनाइज्ड वेन्यू पर उपलब्ध होंगे।
आगे क्या देखना है
SEC अपने टोकनाइज्ड स्टॉक फ्रेमवर्क को कब अंतिम रूप देगा, इसकी कोई तारीख तय नहीं है। यह भी साफ नहीं है कि OKX और ICE इन आपत्तियों के बावजूद अपने वेन्यू की योजना पर आगे बढ़ेंगे या नहीं, और न ही यह पता है कि क्या और कंपनियां भी ब्रॉडकॉम, वेरिज़ॉन और Nasdaq की राह पर चलकर इससे बाहर निकलेंगी। पाठकों को SEC के आगामी बयानों और भाग लेने वाले इश्यूअर की किसी भी अपडेटेड सूची पर नज़र रखनी चाहिए।



