Nvidia, Costco, Nike भी OKX-ICE टोकन विवाद में कूदे

By bonuz NewsroomPublished November 2, 2026
Nvidia, Costco, Nike Join OKX-ICE Tokenized Stock Fight

Nvidia, Costco और Nike उन कंपनियों की बढ़ती सूची में शामिल हो गई हैं जो OKX और ICE की उनके शेयरों के टोकनाइज्ड वर्जन पेश करने की योजना का विरोध कर रही हैं। इस कार्यक्रम के लिए शुरू में चुनी गई कंपनियों में से करीब 70% ने इससे बाहर निकलने का विकल्प चुना है। इसका नतीजा यह तय करेगा कि क्या एक्सचेंज बिना कंपनी की सहमति के सार्वजनिक शेयरों को टोकनाइज कर सकते हैं।

असल में हुआ क्या

CoinDesk की रिपोर्ट के अनुसार, OKX और ICE की टोकनाइज्ड स्टॉक ट्रेडिंग योजना के लिए शुरुआत में चुनी गई कंपनियों में से लगभग 70% ने इससे बाहर निकलने का फैसला किया है। Nvidia, Costco और Nike का नाम इस विरोध में शामिल कंपनियों में लिया गया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक Apple, Tesla और Amazon सहित 19 कंपनियों की ओर से 30 दिन की जवाब देने वाली समयसीमा खत्म होने के करीब आने तक कोई आपत्ति सार्वजनिक नहीं की गई है। न तो OKX और न ही ICE ने संदर्भित रिपोर्ट में कोई सार्वजनिक बयान दिया। Nvidia, Costco, Nike, Apple, Tesla या Amazon में से किसी भी नामित कंपनी का सीधा बयान भी मूल सामग्री में नहीं दिया गया है।

मामला यहां तक कैसे पहुंचा

टोकनाइज्ड स्टॉक्स असल में ब्लॉकचेन आधारित ऐसे टोकन होते हैं जो सार्वजनिक कंपनियों के शेयरों को प्रतिबिंबित करने के लिए बनाए जाते हैं, जिससे सामान्य ट्रेडिंग घंटों के बाहर भी कारोबार संभव हो सके। क्रिप्टो एक्सचेंज और वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां पारंपरिक इक्विटी और डिजिटल असेट बाजारों के बीच एक पुल के रूप में ऐसे उत्पादों को बढ़ावा देती रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, OKX और ICE की योजना ने बड़ी, जानी-मानी कंपनियों का एक बैच पहले उनकी सहमति लिए बिना ही चुन लिया था, जिसके चलते विवरण सामने आने के बाद कई कंपनियों ने इससे बाहर निकलने का रास्ता चुना। यह विवाद उस व्यापक पैटर्न को भी दर्शाता है जिसमें एक्सचेंज यह परखते रहते हैं कि कंपनियों के प्रतिरोध का सामना करने से पहले वे रियल-वर्ल्ड असेट्स को कितना टोकनाइज कर सकते हैं। स्रोत सामग्री में इन कंपनियों से जुड़े पहले के किसी विवाद या घटना का विवरण नहीं दिया गया है।

आपके लिए यह क्यों अहम है

भविष्य में किसी भी टोकनाइज्ड शेयर को रखने वालों के लिए यह विवाद असली कानूनी अनिश्चितता का संकेत है। अगर कंपनियां आसानी से इससे बाहर निकल सकती हैं, तो टोकन धारकों के पास ऐसे उत्पाद रह सकते हैं जो मूल कंपनी के सहयोग से पूरी तरह कटे हुए हों। टोकनाइजेशन प्लेटफॉर्म बनाने वालों के लिए, यह ऊंची ऑप्ट-आउट दर दिखाती है कि कौन से असेट्स टोकनाइज हो सकेंगे, यह तकनीकी तैयारी नहीं बल्कि कंपनी की सहमति तय करेगी। आम क्रिप्टो यूज़र्स के लिए इसका मतलब है कि शुरू में प्रचारित की गई संख्या से कहीं कम ब्लू-चिप टोकनाइज्ड स्टॉक्स असल में लॉन्च हो पाएंगे। OKX जैसे एक्सचेंजों को टोकनाइज्ड शेयर पेश करने से पहले कंपनियों के साथ सीधा समझौता करने की जरूरत पड़ सकती है, जिससे पूरे उद्योग में रोलआउट की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

बड़ा सवाल यह है

क्या किसी कंपनी को अपने ही स्टॉक के टोकनाइज्ड वर्जन को रोकने का अधिकार होना चाहिए, भले ही वह टोकन एक अलग, एक्सचेंज द्वारा जारी किया गया उत्पाद हो और आधिकारिक इक्विटी न हो? इसका जवाब यह तय करेगा कि क्या टोकनाइज्ड रियल-वर्ल्ड असेट्स क्रिप्टो और पारंपरिक बाजारों के बीच एक मुख्यधारा का पुल बन पाएंगे, या कानूनी अस्पष्टता में फंसे रह जाएंगे। यह भी तय करेगा कि किसी कंपनी की वित्तीय पहचान ऑन-चेन किसके नियंत्रण में रहती है।

आगे क्या देखना होगा

कंपनियों की आपत्तियों के लिए 30 दिन की जवाब देने वाली समयसीमा खत्म होने के करीब बताई जा रही है, हालांकि सटीक तारीखें सार्वजनिक नहीं की गई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या OKX और ICE टोकनाइज्ड स्टॉक्स की सूची में बदलाव करते हैं, या ऑप्ट-आउट्स पर कोई आधिकारिक जवाब जारी करते हैं। Apple, Tesla, Amazon या बिना आपत्ति वाली बाकी 19 कंपनियों की ओर से आने वाले किसी भी बयान से भी इस योजना के भविष्य पर स्थिति साफ हो सकती है।

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