RAM प्रति गीगाबाइट कीमतें 2007 के स्तर पर लौट आई हैं, Tom's Hardware में उद्धृत एक वैज्ञानिक ने यह बात कही है। AI चिप्स की मांग ने मेमोरी की करीब दो दशक पुरानी गिरावट को महीनों में पलट दिया। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि मेमोरी की कीमतें फोन, PC और AR ग्लासेज़ जैसे अगली पीढ़ी के डिवाइसेज़ की कीमत तय करती हैं।
दरअसल हुआ क्या
मेमोरी मॉड्यूल की प्रति गीगाबाइट कीमत 2007 के स्तर पर वापस पहुंच गई है, यह बात Lemire नाम के एक वैज्ञानिक ने Tom's Hardware को बताई। Lemire के मुताबिक टेक्नोलॉजी के इतिहास में यह पहली बार है जब कीमतें घटने की बजाय बढ़ी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस उलटफेर से पहले दशकों तक मेमोरी कीमतें लगातार तेज़ी से गिरती रही थीं। AI डिमांड से जुड़ी इस किल्लत ने महीनों के भीतर करीब 20 साल की कीमत गिरावट को खत्म कर दिया। स्रोत सामग्री में सटीक प्रति गीगाबाइट आंकड़े, मॉड्यूल के प्रकार या उलटफेर की ठीक समयरेखा नहीं दी गई है।
यह स्थिति कैसे बनी
2000 के दशक की शुरुआत से मेमोरी कीमतें लगातार नीचे की ओर जा रही थीं, जिसकी वजह मैन्युफैक्चरिंग दक्षता और बढ़ता उत्पादन था। इसी गिरावट ने स्मार्टफोन, लैपटॉप और वियरेबल्स को हर पीढ़ी में सस्ते दामों पर ज़्यादा मेमोरी देना संभव बनाया। लेकिन AI बूम ने इस पैटर्न को पलट दिया है। बड़े लैंग्वेज मॉडल और AI एक्सेलेरेटर बनाने वाले डेटा सेंटर्स ने मेमोरी चिप सप्लाई को सर्वर-ग्रेड RAM की ओर खींच लिया है, जिससे कंज्यूमर चैनलों में सप्लाई कम हो गई है। Tom's Hardware की रिपोर्ट के मुताबिक इसी शिफ्ट ने कंज्यूमर मेमोरी की कीमतों को करीब दो दशक पुराने स्तर पर पहुंचा दिया। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन-से मैन्युफैक्चरर्स या मेमोरी प्रकार, DRAM या NAND, सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं, जिससे यह साफ नहीं हो पाता कि यह असर कितना व्यापक है।
आपके लिए यह क्यों मायने रखता है
डिवाइस निर्माताओं के लिए, जिनमें AR और स्मार्ट ग्लासेज़ बनाने वाली कंपनियां भी शामिल हैं, मेमोरी एक बड़ी लागत है। अब तक सस्ती मेमोरी ने छोटे, हल्के और सस्ते वियरेबल्स बनाना संभव बनाया था। अगर यह उलटफेर लंबे समय तक बना रहा, तो ग्लासेज़, हेडसेट और उनसे जुड़े फोन की बिल ऑफ मैटेरियल्स बढ़ सकती है। उपभोक्ताओं के लिए इसका मतलब हो सकता है नए डिवाइसेज़ पर ज़्यादा कीमतें या स्टोरेज अपग्रेड में देरी। हार्डवेयर स्टार्टअप्स और बिल्डरों के लिए यह रोडमैप प्लानिंग को जटिल बनाता है, क्योंकि आमतौर पर यह मान लिया जाता है कि मेमोरी की कीमतें गिरती ही रहेंगी। अगर यह किल्लत बनी रहती है, तो डिवाइस निर्माता कम मेमोरी वाले वेरिएंट को तरजीह दे सकते हैं या सप्लाई स्थिर होने तक लॉन्च टाल सकते हैं।
बड़ा सवाल यह है
AI डिमांड कम होने या नई मैन्युफैक्चरिंग क्षमता आने से पहले मेमोरी कीमतें कितने समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं? इसका जवाब स्मार्टफोन से लेकर AR ग्लासेज़ तक, मेमोरी चिप्स पर निर्भर हर डिवाइस कैटेगरी की लागत तय करेगा। साथ ही यह भी परखेगा कि क्या यह पुरानी धारणा — कि हार्डवेयर हमेशा सस्ता होता जाता है — AI-संचालित बाज़ार में अब भी टिकती है या नहीं।
आगे क्या देखना है
मौजूदा रिपोर्टिंग में कीमत सुधार की कोई तय तारीख नहीं दी गई है। मेमोरी निर्माताओं की तिमाही आय रिपोर्ट्स और AI चिप डिमांड के आंकड़ों पर नज़र रखें, जो राहत के संकेत दे सकते हैं। Bonuz इस किल्लत का AR और स्मार्ट ग्लासेज़ हार्डवेयर की कीमतों और स्पेसिफिकेशन्स पर असर ट्रैक करता रहेगा, जैसे-जैसे नए डिवाइस बाज़ार में आएंगे।



