अमेरिकन बैंकर्स एसोसिएशन ने ऑफिस ऑफ द कॉम्प्ट्रोलर ऑफ द करेंसी (OCC) पर अपने अंतिम स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड नियम से कांग्रेस को दरकिनार करने का आरोप लगाया है। OCC ने स्टेबलकॉइन से जुड़े थर्ड-पार्टी रिवॉर्ड पर अपनी राय देने से इनकार कर दिया। यह टकराव दिखाता है कि बैंक और क्रिप्टो कंपनियां ग्राहकों की जमा राशि और रिवॉर्ड प्रोग्राम पर नियंत्रण के लिए कैसे भिड़ रही हैं।
दरअसल क्या हुआ
अमेरिकन बैंकर्स एसोसिएशन (ABA) ने आरोप लगाया है कि ऑफिस ऑफ द कॉम्प्ट्रोलर ऑफ द करेंसी (OCC) ने अपने अंतिम स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड नियम को थर्ड-पार्टी रिवॉर्ड प्रोग्राम पर स्पष्ट मार्गदर्शन दिए बिना लागू करके कांग्रेस को दरकिनार कर दिया है। The Block की रिपोर्ट के मुताबिक, जो 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुई, नियामक ने इस सवाल पर चुप्पी साध ली कि क्या थर्ड पार्टियां स्टेबलकॉइन से जुड़े रिवॉर्ड ऑफर कर सकती हैं या नहीं। ABA का कहना है कि OCC की यह चुप्पी सांसदों द्वारा तय की गई दिशा से हटकर है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में ABA अधिकारियों के सीधे बयान, नियम का मूल टेक्स्ट, या अंतिम नियम की प्रभावी तारीख शामिल नहीं है। किसी भी राशि या नियम संख्या का जिक्र भी रिपोर्ट में नहीं है।
यहां तक मामला कैसे पहुंचा
बैंक और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म सालों से इस बात पर भिड़ते रहे हैं कि डिजिटल डॉलर टोकन से जुड़े रिवॉर्ड पर नियंत्रण किसका होना चाहिए। बैंकों का तर्क है कि ब्याज जैसा काम करने वाले रिवॉर्ड बैंकिंग नियमों के दायरे में आने चाहिए, क्योंकि इसे वे अपना नियमित क्षेत्र मानते हैं। वहीं क्रिप्टो प्लेटफॉर्म का कहना है कि रिवॉर्ड एक प्रोडक्ट फीचर हैं, न कि बैंकिंग गतिविधि। रिपोर्ट के मुताबिक, OCC का अपने अंतिम नियम में थर्ड-पार्टी रिवॉर्ड पर कुछ न कहना इस बहस को अनसुलझा छोड़ देता है। यह विवाद उस बड़े सवाल को दर्शाता है जिससे नियामक और सांसद सालों से जूझ रहे हैं—पेमेंट टोकन और बैंक अकाउंट के बीच की रेखा कहां खींची जाए।
आपके लिए इसके क्या मायने हैं
स्टेबलकॉइन होल्डर्स के लिए यह लड़ाई तय करेगी कि रिवॉर्ड प्रोग्राम बचे रहेंगे, बढ़ेंगे, या नई पाबंदियों का सामना करेंगे। bonuz जैसे लाइफस्टाइल ऐप्स सहित क्रिप्टो बिल्डर्स के लिए, जो स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड को इंटीग्रेट करते हैं, नियामकों से स्पष्टता मिलने पर कंप्लायंस से जुड़ी अनिश्चितता कम होगी। बैंकों के लिए, नियम का अनसुलझा रहना प्रतिस्पर्धी दबाव बनाए रखता है, क्योंकि ग्राहक अब भी गैर-बैंक प्लेटफॉर्म से रिवॉर्ड की तलाश कर सकते हैं। कांग्रेस के लिए, ABA का आरोप इस बात का दबाव बढ़ाता है कि वह मामले को नियामकीय व्याख्या पर छोड़ने के बजाय सीधे OCC को जवाब दे। जब तक कोई स्पष्ट नियम या कांग्रेस का बयान नहीं आता, बिल्डर्स और उपयोगकर्ताओं को स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड प्रोग्राम को लेकर अनिश्चितता बनी रहने की उम्मीद करनी चाहिए।
बड़ा सवाल यह है
क्या यह तय करने का अधिकार कि स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड कैसे काम करेंगे, किसी एक बैंकिंग नियामक के पास होना चाहिए, या यह फैसला सिर्फ कांग्रेस का है? इसका जवाब यह तय करेगा कि डिजिटल डॉलर टोकन सीधे बैंक डिपॉजिट से मुकाबला करेंगे, या सिर्फ पेमेंट तक सीमित रहेंगे। यह उस किसी भी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा करता है जो रिवॉर्ड और ब्याज भुगतान के बीच की रेखा को धुंधला करती है। वह रेखा कहां खींची जानी चाहिए, और यह फैसला किसके हाथ में होना चाहिए?
आगे क्या देखना होगा
ABA की औपचारिक प्रतिक्रिया और OCC की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट करने वाले किसी बयान पर नजर रखें। यह भी देखना होगा कि क्या कांग्रेस के सांसद एजेंसी के अंतिम नियम का सीधे जवाब देते हैं। 21 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मूल रिपोर्ट में आगे किसी सुनवाई या समयसीमा का जिक्र नहीं है। आने वाली कवरेज से यह साफ होना चाहिए कि क्या अन्य बैंकिंग समूह भी ABA की इस चुनौती में शामिल होते हैं।



