गूगल ने साफ कर दिया है कि वह अभी स्मार्ट रिंग लॉन्च करने की योजना नहीं बना रही। इसके बजाय कंपनी Fitbit Air के साथ अपनी कलाई-वियरेबल लाइनअप को और मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। Made by Google इवेंट से पहले न्यूयॉर्क में हुई एक राउंडटेबल बैठक में यह फैसला सामने आया, जो दिखाता है कि पूरी वियरेबल इंडस्ट्री अभी भी इस बात को लेकर उलझन में है कि कौन-से डिवाइस, सेंसर और AI फीचर्स आपके शरीर पर स्थायी जगह पाने के लायक हैं।
असल में क्या हुआ
Made by Google से पहले टेक रिपोर्टर्स के साथ हुई राउंडटेबल में गूगल के हेल्थ और होम वाइस प्रेजिडेंट ऋषि चंद्रा (Rishi Chandra) ने बताया कि वियरेबल का इस्तेमाल अभी करीब 30 प्रतिशत लोगों तक ही पहुंचा है। उन्होंने The Verge से कहा, "70 प्रतिशत आबादी को वियरेबल की कोई समझ ही नहीं है।" गूगल के वियरेबल्स सीनियर डायरेक्टर संदीप वराइच (Sandeep Waraich) ने कहा कि कंपनी कलाई-आधारित किसी भी AI इंटरैक्शन को "ग्लांसेबल" मानती है, यानी लगभग सात सेकंड में जानकारी मिल जानी चाहिए। चंद्रा ने इस बात की पुष्टि की कि गूगल निकट भविष्य में स्मार्ट रिंग नहीं बना रही, क्योंकि उनके अनुसार "कलाई-वियरेबल में अभी बहुत गुंजाइश बाकी है" और नए Fitbit Air के पास "कहीं ज्यादा बड़े विस्तार के मौके" हैं। वराइच ने यह भी जोड़ा कि Samsung या Apple को टक्कर देने के लिए कोई "Ultra" Pixel Watch लाने की कोई योजना नहीं है; मौजूदा Pixel Watch ही गूगल का प्रीमियम विकल्प बना रहेगा।
यहां तक पहुंचे कैसे
गूगल ने एक साल पहले ही यह सोच The Verge को बता दी थी कि AI वियरेबल का भविष्य किसी एक डिवाइस में नहीं, बल्कि एक पूरे इकोसिस्टम में छिपा है। इसके बाद से प्रतिद्वंद्वी कंपनियां AI ग्लासेस पर दांव लगाती रही हैं, जिन्हें गूगल "इंटेलिजेंट आईवियर" कहती है, जबकि स्मार्ट रिंग और स्क्रीन-रहित फिटनेस ट्रैकर्स को भी अच्छी पकड़ मिली है। Vocci, Taya और Sandbar जैसे स्टार्टअप्स ने ऐसे पेंडेंट और रिंग पेश किए हैं जो AI की मदद से विचारों को रिकॉर्ड और ट्रांसक्राइब करते हैं। इसके अलावा Meta के कैमरा-युक्त ग्लासेस को लेकर प्राइवेसी को लेकर विरोध भी हुआ है, जो उन जोखिमों को दिखाता है जिनसे गूगल बचना चाहती है। इस महीने टेस्ट किए गए Pixel Watch 5 में पहले से एक Proactive Assistance फीचर मौजूद है, जो स्मार्टवॉच को वह "एम्बिएंट AI हब" बनाने की शुरुआती कोशिश है, जिसकी बात गूगल लगातार करती रही है।
आपके लिए क्यों जरूरी है
यूजर्स के लिए मतलब यह है कि निकट भविष्य में गूगल से कोई नई हार्डवेयर कैटेगरी नहीं आने वाली। अगर आपको आज AI वियरेबल चाहिए, तो गूगल आपको रिंग या पेंडेंट की जगह कलाई की तरफ ही ले जा रहा है। डेवलपर्स के लिए चंद्रा की बात यह संकेत देती है कि माइक्रोफोन अभी भी एक अटकाव वाला मुद्दा है; Fitbit Air जैसे डिवाइस में माइक्रोफोन जोड़ना तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि प्राइवेसी और भरोसे का सवाल है। पूरी इंडस्ट्री के लिहाज से, संसाधनों को बिखेरने से बचने की गूगल की यह सतर्कता नए फॉर्म फैक्टर्स को धीमा कर सकती है, जबकि प्रतिद्वंद्वी कंपनियां रिंग, पेंडेंट और आसपास की आवाज-वीडियो रिकॉर्ड करने वाले ग्लासेस के साथ बेझिझक प्रयोग कर रही हैं।
बड़ा सवाल
गूगल का सुझाव है कि स्मार्ट ग्लासेस के कैमरे ऐसे सेंसर की तरह काम कर सकते हैं जो कभी रिकॉर्ड नहीं करते, बल्कि बिना इमेज सेव किए ही आपके आसपास के सवालों के जवाब दे देते हैं। इससे हर वियरेबल कंपनी के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा होता है: अगर कोई डिवाइस आपकी दुनिया को रीयल टाइम में महसूस कर सकता है, तो क्या उसे उसमें से कुछ भी याद रखने की इजाजत होनी चाहिए, और यह फैसला कौन करेगा—कंपनी, पहनने वाला व्यक्ति, या पास खड़ा कोई अनजान इंसान?
आगे क्या देखना है
इस राउंडटेबल में जिस Made by Google इवेंट का जिक्र हुआ, वह Pixel Watch 5 के लॉन्च और Fitbit Air की शुरुआत के बाद आ रहा है। गूगल ने स्मार्ट रिंग या प्रीमियम "Ultra" Pixel Watch पर दोबारा विचार करने के लिए कोई तारीख तय नहीं की है। वियरेबल्स में माइक्रोफोन को लेकर बहस और स्मार्ट ग्लासेस के लिए कैमरा-ओनली "सेंसर मोड" जैसी अवधारणाएं आगे भी जारी रहने की उम्मीद है, और bonuz.xyz AR व स्मार्ट ग्लासेस हार्डवेयर के इस बदलते दौर पर नजर बनाए रखेगा।



