अमेरिकी सीनेट क्लैरिटी एक्ट नाम के क्रिप्टो बिल को आगे नहीं बढ़ा पाई। वॉल स्ट्रीट की रिसर्च फर्म बर्नस्टीन का कहना है कि इस नाकामी की वजह से स्टेबलकॉइन इश्यूअर्स निष्क्रिय (idle) बैलेंस पर रिवॉर्ड्स देना जारी रख सकते हैं। जो लोग स्टेबलकॉइन रखते हैं या उन पर आधारित प्रोडक्ट बना रहे हैं, उन्हें अब यह देखना होगा कि कांग्रेस द्वारा छोड़े गए इस खाली स्थान को रेगुलेटर्स कैसे भरते हैं।
असल में क्या हुआ
The Block की रिपोर्ट के मुताबिक, बर्नस्टीन ने कहा कि सीनेट में क्लैरिटी एक्ट के आगे न बढ़ पाने से स्टेबलकॉइन इश्यूअर्स को निष्क्रिय बैलेंस पर रिवॉर्ड्स देना जारी रखने की छूट मिल गई है। बर्नस्टीन को उम्मीद है कि अब सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) और कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन (CFTC) क्रिप्टो रूलमेकिंग की कमान संभालेंगे, और यह प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी। 16 सितंबर 2026 को प्रकाशित इस रिपोर्ट में न तो किसी खास वोटिंग तारीख का जिक्र है, और न ही यह बताया गया है कि किन सीनेटर्स ने बिल को रोका। बर्नस्टीन का नोट यह संकेत देता है कि अमेरिकी क्रिप्टो नीति की निकट भविष्य में दिशा कांग्रेस नहीं बल्कि रेगुलेटरी एजेंसियां तय करेंगी। रिपोर्ट में रूलमेकिंग की समयसीमा या प्रस्तावित नियमों की कोई और जानकारी नहीं दी गई है।
यह स्थिति कैसे बनी
क्लैरिटी एक्ट को कानून बनने और क्रिप्टो मार्केट्स के लिए नए संघीय नियम जोड़ने के लिए सीनेट की मंजूरी चाहिए थी। इस बार इसे आगे बढ़ने लायक वोट नहीं मिले। The Block में छपी बर्नस्टीन की रिपोर्ट इसे एक टर्निंग पॉइंट के तौर पर देखती है, जिसमें मोमेंटम कांग्रेस से हटकर रेगुलेटर्स की ओर शिफ्ट होता दिख रहा है। रिपोर्ट यह नहीं बताती कि बिल क्यों अटका या इसमें विस्तार से क्या प्रावधान थे। यह भी साफ नहीं है कि सांसद दोबारा कोई कोशिश करने की योजना बना रहे हैं या नहीं। बर्नस्टीन का आकलन बताता है कि SEC और CFTC की कार्रवाई सीनेट प्रक्रिया से ज्यादा तेज़ हो सकती है और इस तरह असफल वोट से बनी नीतिगत खाई को भर सकती है।
आपके लिए यह क्यों मायने रखता है
स्टेबलकॉइन होल्डर्स के लिए इसका मतलब है कि फिलहाल निष्क्रिय बैलेंस पर रिवॉर्ड प्रोग्राम बिना किसी नई सीमा के जारी रह सकते हैं। बिल्डर्स के लिए, SEC और CFTC के नियम किसी नए कानून से पहले आ सकते हैं, लेकिन एजेंसी के नियम हर नए प्रशासन के साथ बदल सकते हैं। स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड्स देने वाले एक्सचेंज और वॉलेट प्रोवाइडर्स पर फिलहाल कानूनी दबाव कम रहेगा। लंबे समय में, क्लैरिटी एक्ट पास न होने का मतलब है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर बाद में दोबारा गौर कर सकती है, जिससे नई अनिश्चितता बनी रहेगी। स्टेबलकॉइन यील्ड पर प्रोडक्ट बनाने वालों को एजेंसी प्रस्तावों पर करीब से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि रूलमेकिंग किसी कानून से ज्यादा तेज़ी से और बार-बार बदल सकती है।
बड़ा सवाल
अगर कांग्रेस की बजाय रेगुलेटरी एजेंसियां स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड्स के नियम तय करती हैं, तो अलग-अलग राष्ट्रपति प्रशासनों और एजेंसी नेतृत्व में ये नियम कितने टिकाऊ रहेंगे? एजेंसी के नियम हर नई नियुक्ति के साथ बदल सकते हैं, जबकि कांग्रेस से पास कोई कानून पलटना कहीं मुश्किल होता है। यह सवाल सिर्फ स्टेबलकॉइन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्रिप्टो उद्योग के लिए है: क्या एजेंसी रूलमेकिंग, कानून जितनी दीर्घकालिक निश्चितता दे सकती है?
आगे क्या देखना है
आने वाले महीनों में स्टेबलकॉइन नियमों को लेकर SEC और CFTC के प्रस्तावों पर नजर रखें। बर्नस्टीन को उम्मीद है कि यह प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक समयसीमा घोषित नहीं हुई है। कांग्रेस बाद में क्लैरिटी एक्ट का नया वर्जन ला सकती है, लेकिन इसकी कोई तारीख तय नहीं है। इस बीच स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड प्रोग्राम सक्रिय बने रहेंगे। बिल की नाकामी पर रेगुलेटर्स की प्रतिक्रिया के साथ आगे और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।



